कुछ को लग रहा है मुसलमान मारे जा रहे हैं और कुछ को लग रहा है हिन्दू... किसी का भाई दंगो का शिकार हुआ है किसी का बेटा और किसी बाप... कितनी ही औरतों की आबरू को कुचल दिया गया... मगर हर इक अपने-अपनों के गम में उबल रहा है और दूसरों की मौत पर अट्टहास कर रहा है... घिन आती है इस सोच पर!
यक़ीन मानिये इन देशद्रोही नेताओं के हाथों इंसानियत को सरे-आम क़त्ल किया जा चुका है और अब रोज़-बरोज़ इंसानियत की मृत देह चीथड़े-चीथड़े की जा रही हैं।
ख़ुदा खैर करे!!! देश में इलेक्शन आने वाला है।








