हमारे देश के मुस्लिम समुदाय में विशेषकर उत्तर भारत में लड़कों और खासकर लड़कियों से शादी से पहले अकसर उनकी मर्ज़ी तक मालूम नही की जाती है, एक-दुसरे से मिलना या बात करना तो बहुत दूर् की बात है... रिश्ते लड़के-लड़की की पसंद की जगह माँ-बाप या रिश्तेदारों की पसंद से होते हैं. ऐसी स्थिति में निकाह के समय काज़ी के द्वारा 'हाँ' या 'ना' मालूम करने का क्या औचित्य रह जाता है???
मुश्किल वक्त में ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ सकता: शत्रुघ्न सिन्हा
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टीएमसी में सियासी घमासान के बीच शत्रुघ्न सिन्हा का बड़ा बयान
पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों जबरदस्त उथल-पुथल से गुजर रही है। तृणमूल
कांग्रेस (टीएमसी) क...









