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हाल-बेहाल बाजार-ऐ-दिल्ली

दिल्ली में पैदल चलने की आदत बनी रहती है, भला हो हमारे बाज़ारों का पांच मिनट का रास्ता आधा घण्टे में तय करने का मौका मिल जाता है। अगर आप दिल्ली से बाहर चलें जाएं तो भीड़भाड़ की आदत के कारण दिल लगता ही नहीं, ना दुकानों की चकाचैंध, ना हॉकर्स की चिल्ल-पौं...

बोर होने से बचाने का पूरा इंतज़ाम होता है, यहाँ सामान बेचने के लिए हसीन सी आवाज़ें निकाल-निकाल कर राहगीरों का मनोरंजन किया जाता है!  
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