राष्ट्रमंडल खेल

शर्म का समय                                    या                                 गर्व...
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व्यंग्य: युवराज और विपक्ष का नाटक

हमारे युवराज जब भी गरीबों की बस्तियों में रात गुजारते हैं, तो विपक्ष बेचारे युवराज के पीछे पड़ जाता है और उनकी कुर्बानी को नाटक करार दे दिया जाता है. अब आप ही बताइए, किसी गरीब के घर पचास बार चैक करके बनाई गई दाल-रोटी खाना क्या किसी कुर्बानी से कम है? युवराज अगर महाराज बनने से पहले अपनी...
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आपकी आँखों से आंसू बह गए

आपकी आँखों से आंसू बह गए, हर इक लम्हे की कहानी कह गए। मेरे वादे पर था एतमाद तुम्हे, और सितम दुनिया का सारा सह गए। - शाहनवाज़ सिद्द...
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