हमारी आस्था और उसके विरुद्ध लोगों की राय पर हमारा व्यवहार

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  • Shah Nawaz
  • अक्सर लोग अपनी आस्था के खिलाफ किसी विचार को सुनकर मारने-मरने पर उतर जाते हैं, उम्मीद करते हैं कि सामने वाला भी उतनी ही इज्जत देगा, जितनी कि हमारे दिल में है। हालांकि यह नामुमकिन बात है, हर एक की सोच अलग होती है, कैफियत अलग होती है। हम में से हर एक को दूसरे को उसकी आस्था या सोच रखने की आज़ादी का समर्थक होना चाहिए...अपनी आस्था को मानिए पर किसी को भी दूसरे की सोच या आस्था का मज़ाक नहीं उड़ना चाहिए, नीचा...
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    फ़ासिज़्म के पेरुकार

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  • Shah Nawaz
  • फ़ासिज़्म की एक पहचान यह भी है कि इसके पेरुकार अपने खिलाफ उठने वाली आवाज़ को बर्दाश्त नहीं कर सकते, हर हाल में कुचल डालना चाहते हैं...
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    नास्तिक कट्टरता भी उतनी ही खतरनाक है

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  • Shah Nawaz
  • अक्सर नास्तिक भी अपनी आस्था की अंधभक्ति मे आस्तिक अंधभक्तों से ज़्यादा कट्टर बन जाते हैं। और इसी कारण यह दूसरों के तर्कों को कुतर्क की संज्ञा देकर अपने दिमाग़ से दूर छिटक देते हैं। विपरीत सोच रखने वालों की आस्था या विचार का मज़ाक बनाना, नफरत करना और अपनी राय को ज़बरदस्ती दूसरों पर थोपने का ही नाम कट्टरता है। और कट्टरता हक़ बात को किसी भी हाल में क़ुबूल नहीं करने देती...
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    सजा का मकसद केवल दोषी को सुधारना नहीं होता

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  • Shah Nawaz
  • यह एक गलत तर्क है कि सजा का मकसद केवल दोषी को सुधारना होता है, सजा का मकसद केवल दोषी को सुधारना नहीं बल्कि अन्य लोगो को गलत कार्य और उसके परिणाम के प्रति चेताना भी होता है। मतलब बुरे काम का बुरा नतीजा आना आवश्यक है। अगर बुरे काम के भी अच्छे नतीजे आने लगे तो हर कोई बुराई के रास्ते पर बिना झिझक...
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    सामाजिक न्याय और बराबरी के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना पड़ेगा - स्वर्गीय डॉ. असग़र अली इंजीनियर

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  • Shah Nawaz
  • सामाजिक न्याय और बराबरी के लिए लड़ने वाले स्वर्गीय असग़र अली इंजिनियर साहब मुझ जैसे अनेकों के लिए प्रेरणास्त्रोत थे और हमेशा रहेंगे, उन्होंने अपनी सारी ज़िन्दगी गैर-बराबरी और धार्मिक कट्टरपंथ के विरुद्ध संघर्ष में बिता दी... असग़र अली इंजीनियर साहब ने इस्लाम और स्त्रियों के अधिकार, इस्लाम...
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    मदरसों की शिक्षा में परिवर्तन आज की ज़रूरत है

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  • Shah Nawaz
  • अगर माँ-बाप ने दुनियावी पढ़ाई के मरकज़ यानी स्कूल में दाखिला करा दिया और छात्र का जज़्बा आलिम या मुफ़्ती बनने का था तो नहीं बन सकता, ऐसे ही छात्र का दिल तो डॉक्टर / इंजिनियर / मार्केटिंग प्रोफेशनल / डिज़ाइनर इत्यादि बनने का था मगर माँ-बाप ने दाखिला दीनी मदरसे में कराया, इसलिए अब बेमन से वो पढाई...
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    सरकार द्वारा विमर्श के मुद्दे तय करने की रणनीति और कमज़ोर विपक्ष

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  • Shah Nawaz
  • GDP गिर रही है, व्यापार का बुरा हाल है, सारा बाज़ार चंद कारोबारियों की मुट्ठी में पहुंचाया जा रहा है, नौकरियाँ खत्म हो रही हैं, जबरन टेक्स बढ़ाया जा रहा है, महंगाई रोज़ बढ़ रही है, इंफ्रास्ट्रक्चर में कुछ नया नहीं हुआ, सार्वजानिक शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हालात जस के तस बदतर हैं, फसलों के बेहद...
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    नफ़रत पालने वाले

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  • Shah Nawaz
  • इन नफ़रत पालने वालों को कहां परवाह है सत्य की उन्हें बस नफरत है, कुछ नामों से, कुछ चेहरों से, कुछ लिबासों से, और अपने ख़िलाफ़ उठती हुई आवाज़ों से... - शाहनवाज़ 'साहिल' #हिन्दी_ब्लॉगि...
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    दोहरा रवैया या तानाशाही?

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  • Shah Nawaz
  • Ameeque Jamei को भाजपा विधायक ओ पी शर्मा ने मीडिया के सामने तथा आप पार्षद राकेश कुमार को भाजपा पार्षदों ने कैमरे के सामने मारा था, क्या कोई कार्यवाही हुई थी? पर वहीँ दूसरी ओर एक शिकायत भर पर पुलिस दिल्ली के आम आदमी पार्टी के विधायक को प्रेस कॉन्फ्रेंस के बीच में से ही तकरीबन...
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    बदलाव लाने के लिए जागना होगा

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  • Shah Nawaz
  • व्यवस्था की नाकामी या फिर भेदभाव जैसे कारणों से उपजा गुस्सा एक स्वाभाविक क्रिया है... अगर बदलाव चाहते हैं तो इस गुस्से का दुरूपयोग करने की जगह सदुपयोग होना चाहिए... और सब्र से काम लेने वाला ही अपने गुस्से का सदुपयोग कर सकता है। राजनीति जनता को सुनहरे ख्वाब दिखाना भर रह गयी है, जिसका हकीक़त से कोसो दूर का भी वास्ता नहीं होता... वैसे भी सोती हुई कौम को तो बस ख्वाब ही दिखाए जा सकते हैं, हकीक़त में हालात...
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