सबसे बेहतरीन इबादतों में से एक है तन्हाई में अपने ईश्वर को याद करना, जहाँ तीसरा कोई नहीं हो... जैसे कि रात के अंधेरों में उससे बातचीत करना या फिर शौच या स्नान के समय कहना कि जिस तरह शरीर की गन्दगी से मुझे पाक़ किया उसी तरह मेरे विचारों की गन्दगी को भी दूर कर दे...
होर्मुज की तंग गलियों में फंसी दुनिया… और अब शुरू हुआ ‘नया खेल’
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कभी सोचा है… एक पतला सा समुद्री रास्ता पूरी दुनिया की किस्मत तय कर सकता है?
जी हाँ… होर्मुज स्ट्रेट आज सिर्फ पानी का रास्ता नहीं, बल्कि दुनिया की सांस
ब...

छोटी सी पर बहुत बड़ी बात, और फिर दो से भी एक ही रह जाना तन्हाई में... दूसरा भी कोई नहीं...
ReplyDeleteकुँवर जी,
वाह... बेहतरीन हरदीप भाई... बिलकुल सही...
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