यह नतीजें राजनेताओं के लिए सन्देश है कि देश का युवा जागरूक हो रहा है, जो किसी भी कीमत पर खुद को बेवक़ूफ़ बनाने वालों को और बर्दाश्त नहीं करना चाहता!
क्या धार्मिक नफ़रत का शिकार बना अयान सैफी?
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कभी-कभी एक खबर सिर्फ खबर नहीं होती… वो एक मां की टूटती दुनिया होती है, एक
घर की बुझती रोशनी होती है… और एक सवाल बनकर रह जाती है—आख़िर इंसाफ कब मिलेगा?
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साम्प्रदायिकता भ्रष्टाचार ही नहीं, राजनीति में व्याप्त हर बुराई की ढाल है और राजनैतिक दलों को इसके सहारे थोकबंद वोट पाने की आशा रहती है। पर इसके दिन सीमित रहते हैं क्योंकि जनता का भ्रम जल्दी ही दूर हो जाता है।
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